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मानवता की सेवा में काव्य संध्या

देहदान के संकल्प को समर्पित एक विशेष आयोजन

दधीचि देहदान समिति, हिंदी अकादमी दिल्ली और सत्यवती कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में श्री प्रवीण आर्य जी द्वारा अपने पूज्य माता-पिता की पुण्य स्मृति में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। उत्तरी क्षेत्र के संयोजक श्री जी. पी. तायल जी एवं उनकी कर्मठ कार्यकर्ताओं की टीम के सहयोग से यह कार्यक्रम 17 जनवरी 2026 को सत्यवती कॉलेज, अशोक विहार में संपन्न हुआ।

राष्ट्रीय कवि एवं अमर देहदानी आचार्य जगदीश आर्य जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री हर्ष मल्होत्रा जी (केंद्रीय राज्य मंत्री, भारत सरकार) उपस्थित रहे। मंचासीन अन्य गणमान्य अतिथियों में श्री अनिल कुमार जी (प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली), श्रीमती चारु कालरा जी (प्रांत संचालिका, राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली) तथा श्रीमती मंजू प्रभा जी (उपाध्यक्ष, दधीचि देहदान समिति) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती चारु कालरा जी ने देहदान के विषय को अत्यंत भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने उद्गारों को इन पंक्तियों के माध्यम से साझा किया: "माटी आज भी माटी, कल भी माटी, क्या माटी का मोल, मरकर भी जीवन दे जाए, यही माटी का मोल।"

श्री अनिल कुमार जी ने अपने संबोधन में आचार्य जगदीश आर्य जी को 'आधुनिक युग का दधीचि' बताते हुए कहा कि वह प्रत्येक व्यक्ति जो देहदान के संकल्प से जुड़ा है, वह ऋषि दधीचि के समान है। श्री हर्ष मल्होत्रा जी ने समिति की कार्यप्रणाली का परिचय दिया और श्रोताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें यह निर्णय लेना होगा कि हम अपने शरीर को केवल राख बनाना चाहते हैं या किसी के काम आना चाहते हैं। श्रीमती मंजू प्रभा जी ने बहुत ही सहज ढंग से मृत्यु पश्चात की विभिन्न स्थितियों के काल्पनिक दृश्य दिखाकर सभी को यह सोचने पर विवश कर दिया कि इस नश्वर शरीर का अंतिम सदुपयोग क्या होना चाहिए। कॉलेज के प्राचार्य श्री हरिमोहन जी ने कहा कि अलौकिक सुख के भागीदार वही हैं जो अपनी देह से दैवीय कार्यों के प्रति अग्रसर रहते हैं।

स्वागत समिति के सदस्य श्री अनिल मित्तल जी (अध्यक्ष, सतमोला ग्रुप), श्री नवरत्न जी (बीकानेरवाला), समाजसेवी श्री तेजराम जी, समाजसेविका श्रीमती मीनाक्षी जी, श्री विकास जी (सर्वधर्म संगम टीवी) तथा श्री अक्षय कुमार जी (कोषाध्यक्ष, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती) द्वारा सभी अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का दूसरा चरण: इस सत्र में देहदान प्रेरणा और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ का आरंभ श्री प्रवीण आर्य जी की पोती कुमारी सानवी जैन ने एक सुंदर कविता के साथ किया, जिसे देख उपस्थित जन कह उठे कि 'पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं'। सुप्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती कीर्ति काले जी ने देहदान पर अपनी कविता के माध्यम से एक अद्भुत समां बांध दिया और अपनी रचना समिति को भेंट कर दी। मंच पर आसीन श्री सारस्वत मोहन मनीषी जी, श्री राजेश चेतन जी, श्रीमती नेहा शर्मा जी तथा श्री प्रवीण आर्य जी का काव्य पाठ भी अत्यंत सराहनीय रहा।

मंच का सफल संचालन श्री राजेश चेतन जी और श्री प्रवीण आर्य जी ने बखूबी किया। अंत में समिति के महामंत्री श्री विशाल चड्ढा जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और उपस्थित सभी महानुभावों से देहदान का संकल्प पत्र भरने का आह्वान किया।