E-Journal Dadhichi Deha Dan Samiti : May-June2018,देह्दानियोँ का 30 वाँ उत्सव : गाज़ियाबाद क्षेत्र - 8 अप्रैल, 2018
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देह्दानियोँ का 30 वाँ उत्सव : गाज़ियाबाद क्षेत्र - 8 अप्रैल, 2018

संस्कारवान मनुष्य ही श्रेष्ठ जीवन जीता है

दधीचि देहदान समिति, गाज़ियाबाद क्षेत्र का ‘देह्दानियों का 30 वाँ उत्सव’ रविवार दिनांक 8 अप्रैल, 2018 को प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक सम्पन्न हुआ | कार्यक्रम की मुख्य विशेषता थी 142 लोगों द्वारा मरणोपरांत देह/अंग दान का संकल्प लेना | 13 दानी परिवार, जिन्होंने अपने प्रियजनों का देह-अंग दान कराया था, उनका सम्मान किया गया | दीप प्रज्वलन के बाद कविता जी व दीप्ती जी द्वारा वंदेमातरम् गायन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ | उत्सव की मुख्य अतिथि श्रीमती आशा शर्मा, महापौर गाज़ियाबाद थीं | दीदी माँ ऋतंभरा जी की परम साध्वी, समाहिता जी, ने समिति द्वारा किए जा रहे देह/अंग दान के कल्याणकारी कार्य को अपना आशीर्वाद दिया |

रामा मैडिकल कॉलेज, हापुड़ के डॉ. विनय सिंघल, एनॉटमी विभागाध्यक्ष, ने अपनी प्रस्तुति द्वारा समिति के कार्यों और देह/अंग दान के बारे में जानकारी दी | उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मानव शरीर संरचना पढने, समझने के लिए 5-6 छात्रों के लिए एक मृत देह होनी चाहिए पर वास्तव में 35-40 छात्रों के लिए एक देह उपलब्ध हो पाती है | समिति के पास लगभग नौ हज़ार संकल्पकर्ता रजिस्टर्ड हैं और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया l

समिति के गाज़ियाबाद क्षेत्र के संयोजक अविनाश जी ने क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से चर्चा की | मेवाड़ इंस्टिट्यूट में आयोजित क्षेत्र के पहले उत्सव में 331 महानुभावों ने संकल्प लिया था | पांचवें क्षेत्रीय उत्सव के पश्चात लगभग 900 महानुभाव संकल्पक ले चुके हैं | उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी मृत्यु होने पर उन्हें कम से कम नेत्रदान के लिए अवश्य ही प्रेरित करें l

दानी परिवारों के कुछ लोगों ने दान के समय के अपने अनुभव साझा किए | सुश्री सृष्टि अरोड़ा के 31 वर्षीय पति का देहांत 2 महीने पहले हुआ था | उन्होंने बताया कि उनके सास-ससुर की सहमति से पति का नेत्रदान कराया गया | उन्होंने दो मिनट आँखें बंद करके नित्य के सामान्य कार्य करने की चेष्टा करने का आह्वान किया जिससे हम महसूस कर सकें कि बिना दृष्टि के जीवन कितना कठिन है | श्री कुमार अमिताभ ने बताया कि उनके पिता समाजसेवी और नियमित रक्तदानी थे | अपने जीवनकाल में ही उन्होंने निर्णय कर लिया था कि मृत्यु के पश्चात् उनका देहदान होगा और अपने इस प्रण से परिवार को भी अवगत करा दिया था | श्रीमती शुचिता ने बताया कि उनके सास-ससुर ने अपने जावनकाल में ही मरणोपरांत देहदान का अपना संकल्प परिवार को बता दिया था और परिवार ने उनकी इच्छानुसार पिछले दिसंबर में ससुर का देहदान कराया |

श्रीमती आशा शर्मा, महापौर, ने 35-36 वर्ष पहले अलीगढ मेडिकल कॉलेज में अपने चाचा ससुर के नेत्रदान के समय आई दिक्कतों का ज़िक्र किया, क्योंकि उस समय इसकी सुचारू व्यवस्था नहीं थी और नेत्रदान की अनुमति लेने में 3 दिन लग गए थे | किसी तरह अनुमति उनके चाचा ससुर के जीतेजी ही मिल गयी थी और फिर उनके नेत्र उसी शहर में जिस महिला को प्रत्यारोपित हुए उससे वर्षों तक पारिवारिक संम्बंध बने रहे |

साध्वी समाहिता जी ने वात्सल्य ग्राम में दीदी माँ द्वारा पूज्य गुरुदेव की हीरक जयंती के उपलक्ष में 75 लोगों से देह/अंग दान का संकल्प कराने के निर्णय की चर्चा की और बताया कि उसमें दधीचि देहदान समिति के सहयोग से 108 लोगों ने इसके लिए संकल्प लिया | उन्होंने इस विश्वास को चुनौती दी कि अंतिम संस्कार न होने पर मुक्ति नहीं होती | ऋषि- मुनी जंगलों में तपस्या करने चले जाते थे और वहीँ निर्वाण प्राप्त कर लेते थे, बिना अंतिम संस्कार के, तो क्या उनकी गति नहीं होती थी l संस्कारवान मनुष्य ही श्रेष्ठ जीवन जीता है और मरने पर मुक्ति प्राप्त करता है |

अपने सम्बोधन में श्री हर्ष मल्होत्रा, अध्यक्ष, दधीचि देहदान समिति, ने बताया कि यद्यपि समिति पिछले 20 वर्षों से कार्य कर रही है पर पिछले 10 वर्षों में इसने गति पकड़ी है क्योंकि यह विषय अब लोगों को समझ आने लगा है | अब तक समिति में लगभग नौ हज़ार लोगों ने संकल्पपत्र भरे हैं | उन्होंने बताया की कुछ समय पहले पश्चिमी दिल्ली में एक घर की छत गिर गयी | महिला को बहुत चोटें आयीं और अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला को ब्रेन डैड घोषित कर दिया | ग्रीन कॉरिडोर बनवा कर तिलक नगर अस्पताल से एम्स तक अंग लाए गए और इससे 8 लोगों को जीवनदान मिला | हर्ष जी ने इन उदाहरणों को देकर सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे इस बात का संकल्प लें कि हम कम से कम 3 लोगों तक इस विषय को ले जायेंगे l

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कार्यक्रम के संयोजक, श्री वी के अग्रवाल ने अपनी माता के देहदान के बारे में बताया और सबसे पहले उनका धन्यवाद किया कि उन्हें इस पावन कार्य से जुड़ने की प्रेरणा मिली | उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया | समाज के प्रमुख प्रतिष्ठित जन, दधीचि देहदान समिति के महामंत्री श्री कमल खुराना, वरिष्ठ समाजसेवी श्री ललित जायसवाल, श्री सतीश जिन्दल, श्री बी.के. गुप्ता. श्री ओम प्रकाश गुप्ता, श्री अखिल सक्सेना, श्री मुकेश मनचंदा, श्री राकेश अग्रवाल, श्री महेश चौधरी व श्री अरुण त्यागी का भी धन्यवाद किया l सुन्दर मंच संचालन के लिए श्रीमती संध्या सक्सेनाऔर डा. मधु पोद्दार जी का भी धन्यवाद किया गया |